श्मशानघाट का अनुभव
जब आप कभी श्मशान जाएंगे तो एक एहसास आपको जरूर आएगा, उस एहसास भर से एक पल लिए ही सही पर शरीर मे सिहरन आ जाएगी, वो एहसास ये है कि आपको भी एक दिन यहींं आना है, लेकिन उस दिन आप आप नहीं होंगे उस दिन लाश कहलाएंगे आप और उस बेजान शरीर को जिसके बल पर आप दुनिया जीतने का दंभ भरते थे,भी उसी तरह के लकडी के ढेर पर रखा जाएगा और फिर कुछ देर में आग के हवाले और कुछ घंटो में खेल खत्म।
आपके अपने बहुत सारे मुश्किल वक्त देखे होंगे, पर ये अंतिम कुछ घंटे उनके लिए सबसे मुश्किल होते हैं, वो आपकी लाश के पुरी तरह जलने में लगने वाले वक्त से चिढ जाते हैं, वो गंगा घाट पर बहने वाली तेज हवा को भी गाली देने से नहीं चूकते है कि आज ही इतना तेज चलना था इसे।
ये वृध्दावस्था बडा ही खराब दौर है पर आना सभी के साथ है, आप जिन बच्चों के लिए दुनिया की हर खुशी खरीद लेना चाहते थे वही बच्चे आपके अंतिम वर्षों में दुनिया का सबसे गलीच आदमी सिद्ध कर देता है।
कल आप अपने सगे भाई से लडकर जिस जमीन पर हक जमा बैठे थे उस जमीन की फसल से आप ही के बच्चे आपके लिए दवाई भी नही खरीद पाते हैं, लेकिन जैसे ही आप आप न रहकर लाश बन जाते हैं, उस लाश से आपके बच्चे अपने लिए इज्जत का पैमाना बनाना शुरू कर देते हैं, जो कल आपको एक दवाई नहीं दे पा रहे थे आज वही आपके नाम पर लाखों का भोज आयोजन करेंगे।
इस मोह माया भरी दुनिया से आप कोई भौतिक चीज नहीं ले जा पाएंगे न ही अपने किसी सगे संबंधी किसी को आपने साथ चलने कह पाएंगे बस आपके कर्मों का चक्र आपको याद करने का पैमाना बनेगा।
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