भारत, नकल और स्वाभिमान
अमरीका ने अपने विकास की कहानी अपने ही ढंग से लिखी है किसी की नकल नहीं की अमरीका पर किसी का प्रभाव दिखाई नहीं देता हर समस्या का अपना समाधान निकाला शुरू से अमरीका कोई महाशक्ति नहीं था बहुत संकटो और संघर्षो से भरी दास्तान इसकी भी रही है पहले गुलामी का संकट , फिर रेड इंडियन और नए लोगो की जंग अफ्रीका से आये लोगो में भेदभाव और गुलामी प्रथा को लेकर तो विकट गृहयुद्ध ही झेला एक बड़ा देश हो तो उसे भी संभालना कोई आसान तो नहीं रहा होगा इतने विशाल देश में विकास ,सड़को का जाल बिछाना और ,पानी ,बिजली की व्यवस्था अनेको चुनोतियो का सामना किया पहले ब्रिटेन की धौंस और गुलामी थी तो बाद में रूस और उसके मार्क्सवाद का मुकाबला किया मगर कहीं भी किसी की नकल करने ,आसान रास्ता संभालने की कोशिस नहीं की भारत में हम हर महाशक्ति के सामने घुटने टेकते और कमर झुकाते रहे है हमने ब्रिटेन की हर शर्त मानी तो हम रूस से बहुत प्रभावित रहे हमारे हिन्दू नेता भी कभी टर्की के गीत गाते है तो कभी इंडोनेशिया या इजराइल के हमारा अपना कुछ है ही नहीं संविधान तो कई देशो की नकल ,चोरी व् थेगलियाँ लगाकर लिखा गया जब स्वाभिमान...