इन बच्चों कल कैसा होगा?
पिता किसी इंसान के जिंदगी का वो खंभा होता है जो कोई भी भार सह सकता है, कच्ची उम्र मे पिता का साथ छूट जाना उस बच्चे को मानसिक अंपगता की ओर जे जाती है, बहुत बार ये अपंगता दिखता नहीं है पर भीतर ही भीतर घर कर जाता है। चार बच्चे जो अभी अभी अपने पिता को मुखाग्नि देके आया हो और चारों के मन में एक ही विचार चल रहा हो कि आखिर बदला कैसे लें... ये विचार ही उन बच्चों को कातिल बना सकता है। ये तो तय है कि आग लग चुकी है जो किसी भी तरह के पानी से बुझेगी नहीं पर सवाल है कि क्या इस बदले की भावना को जन्म देने के ही लिए हम इस सुशासन और विकास वाली पार्टियों को जिताने में अपना सबकुछ दाव पर लगा दिए। महमदपुर में जो घटना हुई उसमें साफ तौर पर सत्ता संरक्षण मे पले संगठित अपराध की झलक मिलती है... चाहे प्रवीण झा का रावण सेना का गठन हो या मछली/पोखर विवाद में सिर्फ संजय सिंह का जेल जाना, इससे साफ है कि खाकी और खादी के संरक्षण में एक आतंकवादी सरीखे गैंग चल रहा है जिसके मुखिया स्थानीय भाजपा विधायक के करीबी प्रवीन झा हैं। एक परिवार में अगर 5 लोग हैं तो भी सभी का किसी विषय पर एकमत होना मुश्किल होता है पर यहाँ...