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Showing posts from January, 2021

जातिवाद और बिहार

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अभी किसान आंदोलन में खाप पंचायत का भी जिक्र हुआ। हमारे बिहार में इस तरह की पंचायतें नहीं हैं लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्सों में इस तरह की पंचायतें आज भी बजूद में है, इन पंचायतों में सबसे खास बात ये है कि ये लोगों को अपनी जडों से जोडे रखती है, ये जात और वंश के आधार पर बनाई गई पंचायत है। लेकिन खाप पंचायत हमेशा सुर्खियों में तब रही जब मसला अंतर जातीय प्रेम का हुआ। खाप पंचायत कभी भी इस तरह के प्यार मोहब्बत के पक्ष में नहीं रही है और जो भी अंतरजातीय प्यार या शादी का मामला इन तक पहुंचा उसका अंजाम बहुत बुरा हुआ, अंंतर जातीय मोहब्बत के मामले मे खाप हमेशा ऑनर किलिंग का आदेश देकर सुर्खियों में रहा। ऑनर किलिंग के बहुत सारे किस्से अखबारों के कोने में दब के रह जाते हैं पर जब बात बिहार की आती है तो हम बिहारियों को कट्टर जातिवादी घोषित कर दिया जाता है जबकि ऑनर किलिंग का शायद ही कोई मामला यहाँ दिखता है । धर्म और जाति हर व्यक्ति के जीवन का हिस्सा है पर 90 के दौर के नेताओं ने इसे राजनैतिक हथियार बनाने का प्रयोग भर किया और वो सफल रहे। मंडल कमीशन की सिफ...

दर्द-ए-बिहार

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अभी हाल में मनोज वाजपेयी का एक गाना आया "मुंबई मेंं का बा", उसमें बिहार के एक खास वर्ग का जिक्र बहुत ही बढिया और वास्तविक तरीके से किया गया। ये वो वर्ग है जिसे किसी भी मंच या कागज पर मानव संसाधन कहा जाता है पर सच्चाई उससे कहीं अलग है, वास्तव में इस वर्ग को बंधुआ मजदूरों से भी दोयम दर्जे का माना जाता है। ये वही वर्ग है जिसे लॉकडाउन के समय आप और हम  सडकों पर आवारा पशुओं की तरह दौडते हुए देख चुके हैं, ये वही वर्ग जो लॉकडाउन खत्म होने से पहले ही बसों और ट्रेनों में लदकर फिर से उसी जिंदगी को जीने जाते हुए भी देखे, पापी पेट का हिसाब भी तो करना है सभी को। बिहार भले ही स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य, सडक, बिजली, पानी, उद्योग, पर्यटन आदि के मामले में सबसे निचला दर्जा पाता हो पर जब बात आबादी की होती है तो बिहार का नाम ऊपर से खोजने पर 1/2/3 के आस पास ही मिल जाता है। ऐसा क्या है कि बिहारी सिर्फ बच्चे पैदा करने में ही अव्वल है( अगर कोई कहे कि बिहार सबसे ज्यादा IAS/IPS देता है तो पिछले पाँच साल का रिकॉर्ड देख लें)? क्या नहीं था बिहार के पास 1990 के पहले के बिहार को देखने और समझने ...