बिहार बन गया वुहान?
डर का खेल बहुत ही निराला है। बिहार वो राज्य है जहाँ डर का खेल ही सबसे पहले खेला जाता है। चाहे बात लालू के 'जंगलराज' की हो या नीतीश के 'सुशासन' की, दोनो के ही शासन में डर एक सामान्य बात रही है। लोगों को 'भूरा बाल' का डर दिखाकर लालू सामाजिक न्याय के मशीहा बन गये, पर सच्चाई तो ये थी 'भूराबाल' ही लालू के शासन के सबसे पिसा हुआ वर्ग रहा पर ऐसा नहीं है कि सिर्फ नुकसान इसी वर्ग का हुआ, वास्तव मे बिहार के हर तबके को नुकसान हुआ, बिहारी होने के मतलब का नुकसान हुआ, बिहार के सामाजिक व्यवस्था को नुकसान हुआ, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग एवं रोजगार का नुकसान हुआ। फिर नीतीश बाबू सुशासन का स्वर्णिम सपना बाजार मे बेचने निकले और वो एक सफल सेल्समैन साबित हुए उस सपने को बेचने मे। साल दर साल लोग इंतजार मे रहे, अब आएगा सुशासन - अब आएगा सुशासन पर सुशासन तो आने से रहा, पर नीतीश बाबू एक सफल सेल्समैन होने के नाते लालू के उस 'जंगलराज' का याद भी समय समय पर लोगों को दिलाते रहे कि आप 'सुशासन' नहीं खरीदोगे तो 'जंगलराज' खरीदना होगा आपको। और इसी 'जंगलर...