महापर्व छठ
हमारे हिंदु धर्म में बहुत सारे पर्व त्योहार मनाये जाते हैं पर खासकर उत्तर भारत में छठ महापर्व के रुप में जाना जाता है। हमारे यहाँ बडका परब भी बोलते है मतलब बडा पर्व, नाम में ही महानता है और भी बहुत सारी बाते हैं जो छठ को महापर्व साबित करता है। हिंदू धर्म मे ब्राह्मणों को उच्च स्थान दिया गया है, कोई भी बडा पुजा या विधान बिना ब्राह्मण के संपन्न नहीं होता है पर सिर्फ छठ ही ऐसा पर्व है जिसमें हमे ब्राह्मणों की जरूरत नहीं होती। हिंदू धर्म मे वर्ण अर्थात जाति व्यवस्था को उच्च जाति निम्न जाति के नाम पर हर मौके पर कोसा जाता है पर छठ मेंं इस वर्ण व्यवस्था को बहुत महत्व दिया गया है, माली का फूल, डोम का सूप, कुम्हार का बर्तन, धोबी का धुला साडी, ग्वाला का दूध और घी, बडही का आम लकडी, आदि इन सब के बिना छठ हो ही नहीं सकता और इन सब से उपर हर जात बिरदारी के लोग एक ही घाट पर, हर छठ व्रती का एक ही घाट पर डुबकी लगाना दिखाता है छठ अपने आप में अनुठा है। हिंदु धर्म में हर पुजा पाठ मेंं मंत्रों का जाप किया जात है बिना मंत्र के कोई भी पुजा संपन्न नहीं होता और फिर मंत्रों के सटिक उच्चारण पर भी खास जोर दिया...