Posts

Showing posts from February, 2021

बिहार में परीक्षा और प्रति व्यक्ति आय

Image
बिहार बोर्ड वो संस्था है जिसके कंधो बिहार में दशवीं और बारहवीं के परीक्षाओं का जिम्मा है या यों कहें कि बोझ है। जहाँ परीक्षा परीक्षा न होकर त्योहार और मेला बन जाता हो वहाँ कोई भी संस्था इस जिम्मेदारी को बोझ ही मानेगी। शायद ही कोई साल हो जब बिहार बोर्ड बेदाग साबित हुआ हो, 2021 भी बिहार बोर्ड के लिए वही रहा, पेपर लीक, टॉपर घोटाला, खिडकियों से पर्ची पहुंचाना ये सब तो बिहार बोर्ड मे दशकों से आम बात है। एक और खबर है प्रति व्यक्ति आय से संबंधित, हम बिहारी अपने बच्चों को कैसे भी करके परीक्षा पास कराने में विश्वास रखते हैं, लेकिन जब प्रति व्यक्ति आय की बात आती है तो हम फिर फेल साबित होते हैं। आखिर कमी कहाँ रह जाती है कि हर बार की तरह किसी भी तरह रैंकिंग में सबसे निचले पायदान पर आ जाते हैं। जब तक ये नहीं सोचेंगे तब तक दुर्गा पुजा, छठ, होली जैसे त्योहारों में रेलवे प्लेटफार्म पर आम बिहारी लाईन ही लगाएंगे। नीचे के फोटो मेंं जो अमीरी दिख रही है वो सलाना है मासिक नहीं।

सरकारी नौकरी और बिहारी

Image
एक मध्यमवर्गीय बिहारी अपने बच्चे के पैदा होते ही उसका भविष्य सिर्फ और सिर्फ सरकारी नौकरी में देखता है। ये कोई गलत बात भी नहीं है लेकिन अगर गौर करें कि आखिर सिर्फ यही सोच हमारे यहाँ क्यों जगह बना पायी है? बिहार मे सरकारी स्कूल के बारे सोच ऐसी बनी हुई है कि विद्यार्थी और शिक्षक दोनों के लिए ये समय काटने का एक उपयुक्त जगह है, एक आदमी सरकारी शिक्षक बनने के लिए हर जतन करता है, उसका लक्ष्य सिर्फ शिक्षक नहीं बल्कि सरकारी शिक्षक बनना होता है, सरकारी शिक्षक बनते ही सर का बहुत सारा बोझ एक साथ हलका हो जाता है, न रिसेशन का डर और न ही ज्यादा पढाने का दबाव उपर से उपरी कमाई भी अच्छी खासी हो ही जाती है तो कौन सिर्फ शिक्षक बनना चाहेगा। आप एक पिता के तौर पर जब ये सब देखते हैं तो आपको भी अपने बच्चों के लिए यही सब अच्छा लगने लगता है। उपरी कमाई, ये वही सोच है जो एक अच्छे खासे ग्रेजुएट को भी किसी प्रखंड कार्यालय में एक कम्प्यूटर ऑपरेटर बनने के लिए प्रेरित करता है। भले आप अपने बच्चे को एक चौकीदार बनाने में सफल हुए हों पर इस बात से आश्वस्त हो जाते हैंं कि उपरी कमाई तो होगी हीं। तो मेरे हिसाब से भ्रष्टाचार या ...