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बेवफाई, सोनम गुप्ता और आप/हम

अरे वही सोनम गुप्ता, नहीं पहचाने ललन पांडे द्वारा घोषित बेवफा फलाना गुप्ता की बेटी, अब तो पहचान ही गये होगे ना। चलिए सोनम गुप्ता की कहानी आगे बढाने से पहले कछु और देखिए लेते हैं- तो भाई जी उ गुप्ता की बेटी को तो आप बेवफा घोषित करिए दिए पर कभी अपने गिरेवान झांके हैं, नही न, न न न हां तो बोलबे मत कीजिए, अरे दिन भर कालेज और कोचिंग के सामने बैठके ताड़ते रहते हैं, बेचारी बहुतो सोनम तो पढना ही छोड़ देती है, आपही के खातिर और आप ही के पिताजी बतियाते फिरते है बिहार में नारी शिक्षा 0  (जीरो) है। और अगर कुछेक सोनम हिम्मत करके कालेज और कोचिंग जाना जरी रखे तो आप तब तक उसको पीछुआते हैं जब तक उ घर की चौखट से अंदर न हो जाए और हिम्मत करके अगर बाप या भाई को यी बता दे तो भी पढाई बंद और शादी के लिए लड़का देखना शुरु और अगर हिम्मत करके आपको टोक कर कहे कि भैया मुझे पढने दिजिए तो आप उसको बेवफा दर्जा देने के लिए स्टांप पेपर तक खरीदने में देर नहीं करते। सोनम गुप्ता तो नाम मात्र है , अरे आप और हम न जाने रोज ही कितनो को बेवफा घोषित कर रहे हैं पर क्यों ? सवाल तो होना ही चाहिए, चलिए सवाल को गोली मारिए, अरे न...

गुप्ता? सोनम गुप्ता आखिर है बेवफा कैसे हो गई ?

बात उस समय के बिहार की है, जब मोबाइल हमारे बिहार में एलियन से कम न था। सोनम जो कि अभी इंटरे का एग्जाम दे बे की थी और फस्ट आयी, उसके पापा #फलाना गुप्ता भारी भरकम दोकनदारी वाले, ने सोनम से खुश होकर उसे नोकिया का फ्लैगशिप फोन 1100 खरीद दिए और सोनम खुशी खुशी कालेज जाने लगी। और इधर ललन पांडे 3rd  से जैसे तैसे पास करके कालेज में नामांकन लिए। सोनम की काया पांडे जी के नजरों को लगने की देर थी, पहली नजर में प्यार हो गया पांडे जी को। कालेज का पहला दिन किसी तरह कट गया पांडे जी का पर रात तो सालों सा लगने लगा। दूसरे दिन जल्दी हीं पुजा पाढ खत्म कर निकल गये कालेज और लगे उस सुंदर काया का इंतजार करने, शायद वो देर से आयी या पांडेजी ज्यादा जल्दी आ गये पर सोनम की एक झलक पाते हीं पांडेजी बहुत ज्यादा खुश हुए। फिर क्या था ये पांडे जी का रोज का रुटिन हो गया था लेकिन ये आँखो का खेल भी निराला है, महीनों बीतते गये सोनम उसे नजर अंदाज करती रही पर हद हद की भी हद होती है, सोनम से रहा न गया और एक दिन सुबह कुछ जल्दी हीं कालेज का रास्ता नापने निकल गयी, पांडेजी को वहां पाके बहुत गुस्सा हुई, पुछ ली काहे ताकते रहता ...