बेवफाई, सोनम गुप्ता और आप/हम
अरे वही सोनम गुप्ता, नहीं पहचाने ललन पांडे द्वारा घोषित बेवफा फलाना गुप्ता की बेटी, अब तो पहचान ही गये होगे ना।
चलिए सोनम गुप्ता की कहानी आगे बढाने से पहले कछु और देखिए लेते हैं- तो भाई जी उ गुप्ता की बेटी को तो आप बेवफा घोषित करिए दिए पर कभी अपने गिरेवान झांके हैं, नही न, न न न हां तो बोलबे मत कीजिए, अरे दिन भर कालेज और कोचिंग के सामने बैठके ताड़ते रहते हैं, बेचारी बहुतो सोनम तो पढना ही छोड़ देती है, आपही के खातिर और आप ही के पिताजी बतियाते फिरते है बिहार में नारी शिक्षा 0 (जीरो) है।
और अगर कुछेक सोनम हिम्मत करके कालेज और कोचिंग जाना जरी रखे तो आप तब तक उसको पीछुआते हैं जब तक उ घर की चौखट से अंदर न हो जाए और हिम्मत करके अगर बाप या भाई को यी बता दे तो भी पढाई बंद और शादी के लिए लड़का देखना शुरु और अगर हिम्मत करके आपको टोक कर कहे कि भैया मुझे पढने दिजिए तो आप उसको बेवफा दर्जा देने के लिए स्टांप पेपर तक खरीदने में देर नहीं करते।
सोनम गुप्ता तो नाम मात्र है , अरे आप और हम न जाने रोज ही कितनो को बेवफा घोषित कर रहे हैं पर क्यों ? सवाल तो होना ही चाहिए, चलिए सवाल को गोली मारिए, अरे नही गोली तो आदमी को मारा जाता है, खैर छोडि़ए इस सवाल को, रास्ते में चलती हुई लड़कियों को ताड़ते वक्त सोचें अपनी मां, बहन, दीदी या भाभी के साथ जब आप निकलते है तो आप किसे ताकते है लड़कों को, मर्दों को या ज्यादा अपनी मां बहन भाभी को? इसी सवाल में सोनम गुप्ता जैसी बहुतो के बेवबाई के राज है। सोनम गुप्ता की असली कहानी फिर कभी। तब तक आप सवाल के जबाब खोजिए और मैं सोनम गुप्ता की सच्चाई।
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