गुप्ता? सोनम गुप्ता आखिर है बेवफा कैसे हो गई ?
बात उस समय के बिहार की है,
जब मोबाइल हमारे बिहार में एलियन से कम न था। सोनम जो कि अभी इंटरे का एग्जाम दे बे की थी और फस्ट आयी, उसके पापा #फलाना गुप्ता भारी भरकम दोकनदारी वाले, ने सोनम से खुश होकर उसे नोकिया का फ्लैगशिप फोन 1100 खरीद दिए और सोनम खुशी खुशी कालेज जाने लगी।
और इधर ललन पांडे 3rd से जैसे तैसे पास करके कालेज में नामांकन लिए। सोनम की काया पांडे जी के नजरों को लगने की देर थी, पहली नजर में प्यार हो गया पांडे जी को। कालेज का पहला दिन किसी तरह कट गया पांडे जी का पर रात तो सालों सा लगने लगा। दूसरे दिन जल्दी हीं पुजा पाढ खत्म कर निकल गये कालेज और लगे उस सुंदर काया का इंतजार करने, शायद वो देर से आयी या पांडेजी ज्यादा जल्दी आ गये पर सोनम की एक झलक पाते हीं पांडेजी बहुत ज्यादा खुश हुए। फिर क्या था ये पांडे जी का रोज का रुटिन हो गया था लेकिन ये आँखो का खेल भी निराला है, महीनों बीतते गये सोनम उसे नजर अंदाज करती रही पर हद हद की भी हद होती है, सोनम से रहा न गया और एक दिन सुबह कुछ जल्दी हीं कालेज का रास्ता नापने निकल गयी, पांडेजी को वहां पाके बहुत गुस्सा हुई, पुछ ली काहे ताकते रहता है रे? पांडेजी सहम से गये पर किसी तरह हिम्मत करके पूछ ही लिए, क्या नाम है आपका? ....... गुप्ता.... सोनम गुप्ता। जबाब जोरदार था पर एक सवाल के साथ फोन नंबर दो अपना। पांडेजी अब सकपका सा गये, न..न..म्..नंबर नंबर तो नहीं है। अब सोनम का गुस्सा सातवें आसमां पर था, जाने लगी वो, पर जाते जाते पांडे जी का दिल दुखा गयी, बहुत कुछ बोल गयी पर गवार् न बोलना चाहिए था, घाव कर गया दिल पे, आखिर 3rd से ही पास किए पर पास तो किए और मोबाइल का बात क्या करे पांडेजी, सिनियर पांडेजी को तो उस समय उ नाम भी पता न था। फिर पांडेजी को उनके दोस्त ने बताया कि वो फलाना गुप्ता की बेटी है पर बेवफा है। अगले दिन सिनियर पांडेजी को पंडिताई में 500 का अटल जी वालवाला अटल नोट मिला जो भंजने का नामे नय ले रहा था, और सिनियर पांडे ने जूनियर पांडे को ये भारी काम सौंपा तो पांडेजी भी कम न थे, गुप्ता की बेवफाई के मारे नोट पर लिख दिए ""सोनम गुप्ता बेवफा है" और यहीं से हो गयी सोनम गुप्ता बेवफा। बस
जब मोबाइल हमारे बिहार में एलियन से कम न था। सोनम जो कि अभी इंटरे का एग्जाम दे बे की थी और फस्ट आयी, उसके पापा #फलाना गुप्ता भारी भरकम दोकनदारी वाले, ने सोनम से खुश होकर उसे नोकिया का फ्लैगशिप फोन 1100 खरीद दिए और सोनम खुशी खुशी कालेज जाने लगी।
और इधर ललन पांडे 3rd से जैसे तैसे पास करके कालेज में नामांकन लिए। सोनम की काया पांडे जी के नजरों को लगने की देर थी, पहली नजर में प्यार हो गया पांडे जी को। कालेज का पहला दिन किसी तरह कट गया पांडे जी का पर रात तो सालों सा लगने लगा। दूसरे दिन जल्दी हीं पुजा पाढ खत्म कर निकल गये कालेज और लगे उस सुंदर काया का इंतजार करने, शायद वो देर से आयी या पांडेजी ज्यादा जल्दी आ गये पर सोनम की एक झलक पाते हीं पांडेजी बहुत ज्यादा खुश हुए। फिर क्या था ये पांडे जी का रोज का रुटिन हो गया था लेकिन ये आँखो का खेल भी निराला है, महीनों बीतते गये सोनम उसे नजर अंदाज करती रही पर हद हद की भी हद होती है, सोनम से रहा न गया और एक दिन सुबह कुछ जल्दी हीं कालेज का रास्ता नापने निकल गयी, पांडेजी को वहां पाके बहुत गुस्सा हुई, पुछ ली काहे ताकते रहता है रे? पांडेजी सहम से गये पर किसी तरह हिम्मत करके पूछ ही लिए, क्या नाम है आपका? ....... गुप्ता.... सोनम गुप्ता। जबाब जोरदार था पर एक सवाल के साथ फोन नंबर दो अपना। पांडेजी अब सकपका सा गये, न..न..म्..नंबर नंबर तो नहीं है। अब सोनम का गुस्सा सातवें आसमां पर था, जाने लगी वो, पर जाते जाते पांडे जी का दिल दुखा गयी, बहुत कुछ बोल गयी पर गवार् न बोलना चाहिए था, घाव कर गया दिल पे, आखिर 3rd से ही पास किए पर पास तो किए और मोबाइल का बात क्या करे पांडेजी, सिनियर पांडेजी को तो उस समय उ नाम भी पता न था। फिर पांडेजी को उनके दोस्त ने बताया कि वो फलाना गुप्ता की बेटी है पर बेवफा है। अगले दिन सिनियर पांडेजी को पंडिताई में 500 का अटल जी वालवाला अटल नोट मिला जो भंजने का नामे नय ले रहा था, और सिनियर पांडे ने जूनियर पांडे को ये भारी काम सौंपा तो पांडेजी भी कम न थे, गुप्ता की बेवफाई के मारे नोट पर लिख दिए ""सोनम गुप्ता बेवफा है" और यहीं से हो गयी सोनम गुप्ता बेवफा। बस
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