अपने कल को ये कैसा उपहार?

हम, मतलब हम सभी अपने पुश्तैनी चीजों पर जी रहे हैं, बात संपति की हो या संस्कार की, ये हमें उपहार के रुप में ही मिलता है। जाते जाते हमारे पूर्वज हमें बहुत सारी सुविधायें दे गये हैं, अब हम पर निर्भर करता है कि उसका उपयोग कैसे करें, पर क्या हमारे पूर्वज हमें उपहार में सिर्फ उपयोग की चीजें ही दे गये हैं?

और अगर बात करें आने वाले कल की तो हमारे बच्चे जब बडे हो जाएगें तो वो अपने बच्चों को किस्से सुनाया करेंगे, जात पात, उंच नीच, अगडा पिछडा वाली बातें हमें हमारे दादा परदादा या उनसे पहले के लोगो ने किया पर उन सब से कहीं बडी बात हमारे पिताजी, चाचाजी किया करते थे, लडकी के घर में घुस कर ही रेप कर देते थे, अरे उससे बडा हिम्मत वाला तो गया जिला में था कि एक पति को पेड में बांधकर उसके सामने ही उसकी पत्नी और बेटी का बलात्कार कर दिया, और इस शेरदिली बात पर हमारे पोते पोतियां तालियां बजाएंगे। फिर कहानी और आगे बढेगी, एक ऐसे मोड़ आ जाएगी कि वहाँ  कहानी सुनने और सुनाने वाले सभी खामोश हो जाएंगे, बात एक बहादुर, होनहार, गया जिले के सबसे बडे कालेज के प्रोफेसर पर आकर रुकती है, पिता अपने बच्चों को बता रहा होता है आखिर गलती क्या थी प्रोफेसर साहब की जो उन्हें शहर छोडके भागना पडा, बस इतनी सी की फूवर के फेवर मांग लिया, और उस नालायक निर्लज्ज लडकी का क्या, जो थोडा मोबाइल चलाने क्या सीख गई, प्रोफेसर साहब की सारी बातें रिकॉर्ड करके वाईरल कर दी। कहानी फिर आगे बढेगी, पिता अब अपने समय की सबसे बडी उपलब्धि के बारे में बताते हैं, कि उस समय 6 साल की बच्ची भी हवस के निशाने पर होती थी, उस समय का राजनीति भी न्यारे व्यारे ही था, जात और धर्म देख के निंदा किया जाता था, नेता गण 12 बजे रात में पोर्न देखने के बाद रेप के खिलाफ मोमबत्ती जलाने निकलते थे। किसी भी रेप में मिडिया सबसे पहले खोद खोद के धर्म वाला एंगल निकालती थी, फिर फाइनल होता था कि इस रेप पिडिता को माथे पर बिठाया जाए या पैरों से रौंदा जाए। फिर 

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