बिहार- जंगलराज पार्ट 2


बिहार की एक पहचान हुआ करती थी, लोग जंगल राज कहा करते थे बिहार के शासन को I
बिहार के उस दौर की बात करे तो पढ़ की ही डर न गये तो कहना, वो 80-90 का दशक था जब बिहार की पहचान नरसंहार से होती थी, उस दौर में अखबारों की हेडलाइंस बिना किसी नरसंहार के पुरी नही होती थी, गया जहानाबाद औरंगाबाद आरा नवादा इन नरसंहारो का गढ़ हुआ करता था पर धीरे धीरे ही सही वो तस्वीर बदली I नितिशे बाबु थे जो हम बिहारियों को जंगल राज से आगे सुशासन का रास्ता दिखाए, लगा की बिहार अपने इतिहास को फिर दोहराएगा, और अगर बिहार की गाड़ी उसी पटरी पे दौड़ते रहता तो वो दिन भी दूर नही था पर अचानक एक ब्रेक लगा और वो ब्रेक अहम का था अहम माने अहंकार माने घमंड और फिर क्या बिहार की तेज दौड़ती गाड़ी रिवर्स ले ली और हत्या बैंक डकैती छिनतई अपहरण फिर चरम पर पहुच गई I 

माने जंगलराज पार्ट 2 मान सकते हें, पर एक नई चीज जो घर कर गई वो हे बलात्कार छेड़खानी अश्लील विडियो बनाना ये कभी भी हमारे बिहार की पहचान नही थीI गया औरंगाबाद ये जिले नरसंहारो को भूल के आगे बढे ही थे की बलात्कार की घटनाये फिर से उन जख्मो को कुरेदने जैसा हो गया, अभी ठीक से दो महीने भी नही हुए औरंगाबाद में हुई दरिन्ग्दगी का, कि गया में एक डाक्टर को पेड़ में बांधकर उसके सामने ही उसकी पत्नी और बेटी से बलात्कार, हम यहाँ गिरी हुई मानसिकता से ज्यादा दोष कानून का डर न होने को देंगे, और रही कानून और प्रशासन की तो वो गई तेल लेने अरे न न न अब तेल वाली बात पुरानी हो गई अब तो पुलिस दारू लेने जाती है, और उससे भी न हुआ तो मुह सूंघ के किस भी करती है I
अच्छा कोई ये बता सकता है, बिहार के किस कोने में बहार है जिसकी चर्चा नितिशे कुमार अपना उ गाना में करवा रहे थे I

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