तेरा क्या है (कविता) Tera kya Hai (Poem)

तेरा क्या है,
 जो तू हक जता रहा है|
 तू क्या लाया था,
 जो हमें बता रहा है|
तू तो कुछ था ही नही,
फिर क्यों इतना इठला रहा है|
 हर मांग पूरी की तेरी ,
फिर क्यों इतना रुला रहा है|
 सोचा सुधर जायेगा एक दिन,
 पर मुझे ही आँखे दिखा रहा है|
हाँ! तेरी इस फितरत को,
कोई तेरा ही अपना रहा है |
जो बो रहा हे वही पायेगा,
क्यूंकि तू ही तो उसे ये सब सिखा रहा है ||

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