मेरा सपना (कविता) My Dream (Poem)
एक दिन
बैठा लगा सोचने|
मन चला अपनी वजूद धुंडने|
आतीत के गलियारों में दौड़ने|
और फिर,
रास्ते में दिखा एक कारवां |
पता चला उसपे हे एक माँ|
छोड़ के जा रही हे ये जहाँ|
पूछा ऐसा क्यूंं,
इतने में रो पड़ा आसमान|
बेटे ने किया इसका अपमान|
आज दे दी खुद अपनी जान|
दुखी हो गया मेरा मन|
फिर पूछा मन से,
माँ ने उठाये लाखो सितम|
देने को मुझको जनम|
फिर क्यूँ मई करूँ ऐसे करम|
फिर अचानक,
आवाज़ आई अलार्म बजनेका|
मन नहीं था अभी जागनेका|
अंत हो गया मेरे सपने का|
बैठा लगा सोचने|
मन चला अपनी वजूद धुंडने|
आतीत के गलियारों में दौड़ने|
और फिर,
रास्ते में दिखा एक कारवां |
पता चला उसपे हे एक माँ|
छोड़ के जा रही हे ये जहाँ|
पूछा ऐसा क्यूंं,
इतने में रो पड़ा आसमान|
बेटे ने किया इसका अपमान|
आज दे दी खुद अपनी जान|
दुखी हो गया मेरा मन|
फिर पूछा मन से,
माँ ने उठाये लाखो सितम|
देने को मुझको जनम|
फिर क्यूँ मई करूँ ऐसे करम|
फिर अचानक,
आवाज़ आई अलार्म बजनेका|
मन नहीं था अभी जागनेका|
अंत हो गया मेरे सपने का|

Comments