बिहार में रोजगार के अवसर अपार, धन्यवाद नीतेशे कुमार (व्यंग)

किसी भी राज्य में नये रोजगार के अवसर होंगे या नहीं, ये बात पूर्णतया वहां के सरकार के फैसलों पर हीं निर्भर करता है। रोजगार के लिए राज्य के नीति निर्माता ही जिम्मेदार होते हैं कि वहाँ रोजगार के नये अवसर उपल्बध होंगे या नहीं।
अगर बिहार की बात करें तो यहाँ नीतेशे कुमार जी लगातार अपने तीसरे कार्यकाल को पूरा करने वाले हैं और उनका रोजगार सृजन से संबंधित बातें बिल्कुल सत्य साबित हो रही है। आज अगर कोई भी बिहार से दिल्ली, बंबई, पंजाब आदि की ओर जाने वाली ट्रेनों को देखेगा तो उसका एक ही जबाब होगा Indian Railways तो ये सारी ट्रेनें घाटे में चला रही है

 क्योंकि उन ट्रेनों में तो सिर्फ Tourist ही हैं जो दिल्ली-बंबई घुमने जा रहे हैं वो भी काफी कम लोग क्योंकि सब अपने अपने रोजगार में जुटे हैं।
ये सारा कमाल तो नीतेश जी के बदौलत हो पाया है न।
उनका एक प्रोजेक्ट था सहज बसुधा केंद्र, उसके तहत नीतेशे बाबू युवाओं को ये केंद्र खुलवाए, अब शायद वो बंद हो गया है काहे कि युवा उससे कुछ ज्यादा ही कमा लिए थे, अब और कमाते तो ई मोदिया धर लेता, इहे कारण उ प्रोजेक्ट बंद हो गया, मुझे तो ऐसा ही लगा सच चाहे जो भी हो। 
अबकी बार उससे भी जबर प्रोजेक्ट लेके आए रोजगार सृजन को ध्यान रखकर, ताडी का नीरा


भाई ई नीरा तो कमाले कर दिया, पटना, भागलपुर, गया जैसे शहरों में इसका Stall देख के, और नीरा Stall वाले का कमाई देखके आंखें चोंधिया गया हमरा, एक ग्लास हम भी पी के देखे तो पता चला अमूल का लस्सी फेल हे इसके सामने।
और सबसे बडा रोजगार IT के जानकारों के सृजन किए, बिहार के हर बडे शहर में IT Park Develope करके किए, आज बाल ठाकरे साहब होते तो सोचते और पचताते कि काहे हम बीच बीच में ठोका करते थे बिहारियों को, अब बंबई में कौन रहेेगा, बंबई तो विराण हो जाएगा।
तो हम देख सकते हैं कि बिहार में हर क्षेत्र में रोजगार सृजन हुआ है और इ बडका सृजन के लिए नीतेशे जी को तहे दिलेे धन्यवाद।

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