लखीसराय की समस्याएं
किसी भी शहर के विकास में बहुत सारी चीजों का योगदान होता हैं, जैसे- बेहतर सडकें, बेहतर प्रशासनिक सुविधाएं, आय का स्रोत, शिक्षण संस्थान, बेसतर रेल आवागमन इत्यादि।
लखीसराय सिर्फ रेल नेटवर्क के मामले में अच्छा है पर अभी भी बहुत सारे सुविधाओं का अभाव से जूझ रहा है लखीसराय।
लखीसराय में सडक अभाव इसके विकास को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है, क्योंकि सडकों का विकास ही किसी भी शहर के विकास का पहला मार्ग है और यही मार्ग यहां अवरुद्ध दिखाई देता है, मिला क्या है लखीसराय को एक अदद बाईपास, जो आजतक ढंग बन ही रहा है और लोगों को अगर लगे ये लखीसराय को मुक्ति दे देगा तो वो गलत सोच रहे हैं।
अब अगर बात करें बेहतर प्रशासनिक सुविधाओं के बारे में तो कम से रात 9:30 बजे के बाद सबसे बेहतर दिखेगी, अगर ये बात आप नहीं समझ रहे तो रात को नो एंट्री खत्म होने पर आप खुद ही देखें और फिर लखीसराय का क्राइम रेट से और बेहतर पता चल जाएगा, फिर अभी बहुत ही सारी घटनाओं से साफ हो जाएगा आखिर चल क्या रहा है यहाँ।
आय के स्रोतों की बात करें तो खेती, दुकानदारी और सरकारी नौकरी, पर क्या यही प्रयाप्त है? हमारे यहाँ बहुत सारे पर्यटन स्थल जिसे बहुत कारणों से भाव ही नहीं मिल पाता है नहीं तो ये भी आय का एक बडा स्रोत बन सकता है, कृषि आधारित उद्धोग जो यहाँ आय का एक बडा स्रोत हो सकता था पर यहां कुछ भी नहीं है। और बडे उद्धोगों की बात ही न करें।
आय के स्रोतों की बात करें तो खेती, दुकानदारी और सरकारी नौकरी, पर क्या यही प्रयाप्त है? हमारे यहाँ बहुत सारे पर्यटन स्थल जिसे बहुत कारणों से भाव ही नहीं मिल पाता है नहीं तो ये भी आय का एक बडा स्रोत बन सकता है, कृषि आधारित उद्धोग जो यहाँ आय का एक बडा स्रोत हो सकता था पर यहां कुछ भी नहीं है। और बडे उद्धोगों की बात ही न करें।
लखीसराय शिक्षण संस्थानों के मामले में बहुत ही पीछे है, प्राथमिक शिक्षा बस मिड डे मील और कुकुरमुत्ते जैसे खुले विद्यालयों में अटकी है। बालिका विद्यापीठ, D.A.V, St. Joseph और एक संस्थानों से कुछ राहत तो है फर काफी नहीं है। और उच्च शिक्षा की बात न करुं तो भी ठीक ही होगी।
एक बाइपास तो है पर अभी से ही उसके आसपास घनी आबादी बस चुकी है और उसमें भी दो तीन चौक इसे और बद्दतर बना देगी, भले उसमे बाजार वाले रोड जैसी जाम वाली समस्या ना बने पर कम भी न होगी, क्योंकि Futuristic नहीं है, उससे बस कुछ वर्षों तक राहत होगी।
रेल सुविधा तो ठीक है क्योंकि लखीसराय दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग पर स्टेशनों का हाल बद से भी बद्दतर है, लखीसराय हो या क्यूल रेलवे स्टेशन दोनों ही खस्ताहाल हालत में है। क्यूल स्टेशन जाने का कोई बेहतर सडक न होने के यात्रियों को मुश्किलों का सामना हर रोज करना होता है। और लखीसराय नगर परिषद तो शायद लखीसराय का भाग्य विधाता है, वास्तव में मुझे नगर परिषद के कार्यों की सही जानकारी नहीं है तो ज्यादा नहीं लिख सकता पर जितना लिखा वो भी गलत नहीं है।
अगले पोस्ट में समस्याओं के निदान पर अपनी राय रखूँगा।




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