मंगल ग्रह (Mars) इनके पूर्वजों का है?
क्या आप सोच सकते हैं कि धरती से सैकड़ों-हजारों मील दूर मंगल ग्रह पर किसी का अधिकार हो सकता हैं? शायद आपका भी जबाब न होगा, मेरा भी ऐसा ही मानना था पर ये गलत साबित हुआ ।
दुनिया में बहुत से लोग है जिनका मानना है कि सभी ग्रहों पर उनके पूर्वजों का अधिकार रहा है तो उस हिसाब से अब उनका अधिकार है। आईए जानते है वो कौन हैं जिनका अधिकार है मंंगल ग्रह पर...
1997 में यमन के तीन लडकों, एडम इस्माईल, अब्दुलाह-अल-उमेरी और मुस्तफा खलील ने अपने देश यमन के सरकारी अभियोक्ता के जरिए सयुंक्त राज्य अमेरिका को उसके अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) पर मुकदमा करने का किया, उन लडकों के मुकदमें के अनुसार नासा को अगर मंगल ग्रह या किसी भी ग्रह पर किसी भी तरह का कोई भी रिसर्च करने से पहले उनकी अनुमति लेनी होगी क्योंकि ये ग्रह उनके पूर्वजों का है पर यमन के समझदार अभियोक्ता ने ऐसा करने की सोचने के लिए भी उन लडकों का डांटा और आगे ऐसा करने पर जेल भेजने की भी धमकी दी। 1967, में अमेरिका ने बाहरी अंतरिक्ष से संबंधित एक अनुबंध बनाया कि अंतरिक्ष के किसी भी ग्रह पर किसी भी देश या व्यक्ति का कोई अधिकार नहीं होगा और यमन भी उस अनुबंध पर दस्तखत किया और उसे मानता भी है।
तो समझ गए की अंतरिक्ष में किसी भी व्यक्ति या देश का कोई भी अधिकार नहीं है और जो भी अधिकार की बात करते हैं वो सिर्फ नाम कमाने का के लिए ऐसा करते हैं।
दुनिया में बहुत से लोग है जिनका मानना है कि सभी ग्रहों पर उनके पूर्वजों का अधिकार रहा है तो उस हिसाब से अब उनका अधिकार है। आईए जानते है वो कौन हैं जिनका अधिकार है मंंगल ग्रह पर...
1997 में यमन के तीन लडकों, एडम इस्माईल, अब्दुलाह-अल-उमेरी और मुस्तफा खलील ने अपने देश यमन के सरकारी अभियोक्ता के जरिए सयुंक्त राज्य अमेरिका को उसके अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) पर मुकदमा करने का किया, उन लडकों के मुकदमें के अनुसार नासा को अगर मंगल ग्रह या किसी भी ग्रह पर किसी भी तरह का कोई भी रिसर्च करने से पहले उनकी अनुमति लेनी होगी क्योंकि ये ग्रह उनके पूर्वजों का है पर यमन के समझदार अभियोक्ता ने ऐसा करने की सोचने के लिए भी उन लडकों का डांटा और आगे ऐसा करने पर जेल भेजने की भी धमकी दी। 1967, में अमेरिका ने बाहरी अंतरिक्ष से संबंधित एक अनुबंध बनाया कि अंतरिक्ष के किसी भी ग्रह पर किसी भी देश या व्यक्ति का कोई अधिकार नहीं होगा और यमन भी उस अनुबंध पर दस्तखत किया और उसे मानता भी है।
तो समझ गए की अंतरिक्ष में किसी भी व्यक्ति या देश का कोई भी अधिकार नहीं है और जो भी अधिकार की बात करते हैं वो सिर्फ नाम कमाने का के लिए ऐसा करते हैं।
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