मुसलमान और इनकी दिक्कतें
मुसलमान, इस दुनिया के मानचित्र में एक
बहुत बडा
धर्म समुदाय है। कहने
को तो
ये बहुत
ही शांतिप्रिय कौम मानते
हैं अपने
आप को
पर इनको
हर उस
चीज से
दिक्कत या
यों कहें
नफरत है
जो इन्हीं के आसपास
है। मौलाना साहब इनके
धार्मिक गुरू
होते हैं
और ये
कौम उनपर
आँख मूंदकर आस्था रखते
हैं, आस्था
रखनी ही
चाहिए क्योंकि ये उनके
गुरू होते
हैं।
पर
यही
मौलाना
साहब
बहुत
बार
इस
कौम
के
लिए
रोडा
बन
जाते
हैं,
और
इनका
धर्म
भी
गजब
का
है
हर
घडी
खतरे
में
आ
जाती
है।
अभी
हाल
का उत्तर-प्रदेश का वाक्या देखें तो पाएंगे कि इनका धर्म मुस्लिम औरतों के सैलून जाकर सजने सुंदर दिखने से भी खतरे मे आ जाता है, मुस्लिम औरत अकेली कहीं जाए तो भी इस्लाम खतरे में, टेलीविजन देखने से भी इस्लाम खतरे में, मंदिर के घंटे की आवााज से खतरे मेें और भी बहुत सारी चीजें जो किसी भी मनुष्य के जीवन का एक अंग बन गया उनसें भी इस्लाम खतरे में आ जाता है। पर क्यों इसका कोई सटीक जबाब मौलाना साहब नहीं देते।
उनकी
दिक्कतें यहीं सीमित नहीं है, कभी इजरायल के यहूदियों को मारते
हैं, कभी
म्यांमार के
बौद्धों को,
कभी भारत
के हिंदुओं को, तो कभी जहां मन किया वहीं बम लगा दिया। ये सब करते ये बात जोर देकर चिल्लाते हैं- अल्ला-हु-अकबर,
और
ये
तीन
शब्द
औरौं
के
लिए
खतरा
बन
जाता
है।
शायद
ऐसा
करने
वाले
इन
शब्दों
का
मतलब
नही
जानते
है
अगर
जानते
तो
शायद
ऐसा
न
करते।
पर
दिक्कत
क्या
है
स्पष्ट
नहीं
कर
पाते।
मान
लिया
ये
यहूदी,
बौद्ध,
हिंदू
दूसरी
कौमें
है
और
शायद
इन
सब
से
इन्हें
खतरा
हो
सकता
है,
मान
लिया
ये
सारी
कौमें
इस्लाम
के
लिए
खतरा
है
ही
है
पर
ये
मोहम्मद साहब को मानने वाले आफगानिस्तान में किससे लड रहे है, सीरिया में कौन हैं इनके दुश्मन, पाकिस्तान में स्कूली बच्चों को
मारकर ये इस्लाम को किस खतरे से बचाना चाह रहे थे, नाइजीरिया, इराक, लीबिया जैसे मुस्लिम देशों मुसलमानों को ही मारकर ये इस्लाम को किस बडे खतरे से बचा रहे हैं।
कोई भी मुस्लमान ये बता सकता है कि उन्हें ये सारी दिक्कतें कैसे और क्यों है?
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