छठ महापर्व से जुडी मान्यताएं
छठ पर्व भारत में सूर्य उपासना से जुडा एक पर्व है, शास्त्रों के अनुसार सूर्य देव और छठी माता में भाई -बहन का संबंध हैं। केरल का 'ओणम', उतराखंड में 'उत्तरनारयण पर्व', कर्णाटक का 'रथसप्तमी पर्व' और मुख्यरूप से बिहार, उत्तरप्रदेश, झारखंड और नेपाल तराई क्षेत्र में मनाया जाने वाला छठ पर्व दर्शाता है कि भारत वर्ष किसी न किसी रूप में सूर्य का उपासक है।
छठ महापर्व भी सूर्य उपासना से जुडा चार दिवसीय पर्व है।
मान्यताएं और इतिहास:-
रामायण से जुडी मान्यता:- भगवान राम के लंका विजय के बाद आयोध्या पहुचने पर रावन वध पाप से मुक्ति हेतु राजसूर्य यज्ञ किया गया वहाँ यज्ञ में आमंत्रित मुग्दल ऋषि ने सीता माता को कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की षष्ठी को सूर्य देव उपासना करने की सलाह दिए और इस मान्यता के अनुसार सीता माता के द्वारा ही पहली बार छठ पर्व मनाया गया।
महाभारत काल से जुडी मान्यता :- सूर्य पुत्र कर्ण सूर्यदेव के बहुत बडे भक्त थे और दिनभर नदी मे खडे हो सूर्य भक्ति में लीन हो जाते थे। एक और मान्यता के अनुसार पांडवों का कौरवों से जुए में अपना सब कुछ हारने पर द्रौपदी छठ व्रत की थी और परिणाम स्वरूप पांडवों को यूद्ध के अपना राजपाट वापस मिल गया।
राजा प्रियवद से जुडी मान्यता:-
महर्षि कश्यप के आशीर्वाद से राजा प्रियवद की पत्नी को एक पुत्र तो हुआ पर मरा हुआ, जब राजा अपने पुत्र को दाह संस्कार के लिए श्मशान ले गए उसी वक्त मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुई और उन्होंने कहा कि वो सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंस से उत्पन्न हुई है और इसी कारण वो ष्षठी भी कहलाती है। उन्होंने राजा प्रियवद को उनकी पुजा करने और दूसरों को भी उनकी पुजा करने के लिए प्रेरित करने को कहा। राजा प्रियवद ने पुत्र प्राप्ति हेतु षष्ठी का व्रत किया और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई और तभी से छठ पर्व पुत्रों के लम्बी आयु के लिए भी की जाती है।
छठ महापर्व भी सूर्य उपासना से जुडा चार दिवसीय पर्व है।
मान्यताएं और इतिहास:-
रामायण से जुडी मान्यता:- भगवान राम के लंका विजय के बाद आयोध्या पहुचने पर रावन वध पाप से मुक्ति हेतु राजसूर्य यज्ञ किया गया वहाँ यज्ञ में आमंत्रित मुग्दल ऋषि ने सीता माता को कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की षष्ठी को सूर्य देव उपासना करने की सलाह दिए और इस मान्यता के अनुसार सीता माता के द्वारा ही पहली बार छठ पर्व मनाया गया।
महाभारत काल से जुडी मान्यता :- सूर्य पुत्र कर्ण सूर्यदेव के बहुत बडे भक्त थे और दिनभर नदी मे खडे हो सूर्य भक्ति में लीन हो जाते थे। एक और मान्यता के अनुसार पांडवों का कौरवों से जुए में अपना सब कुछ हारने पर द्रौपदी छठ व्रत की थी और परिणाम स्वरूप पांडवों को यूद्ध के अपना राजपाट वापस मिल गया।
राजा प्रियवद से जुडी मान्यता:-
महर्षि कश्यप के आशीर्वाद से राजा प्रियवद की पत्नी को एक पुत्र तो हुआ पर मरा हुआ, जब राजा अपने पुत्र को दाह संस्कार के लिए श्मशान ले गए उसी वक्त मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुई और उन्होंने कहा कि वो सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंस से उत्पन्न हुई है और इसी कारण वो ष्षठी भी कहलाती है। उन्होंने राजा प्रियवद को उनकी पुजा करने और दूसरों को भी उनकी पुजा करने के लिए प्रेरित करने को कहा। राजा प्रियवद ने पुत्र प्राप्ति हेतु षष्ठी का व्रत किया और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई और तभी से छठ पर्व पुत्रों के लम्बी आयु के लिए भी की जाती है।
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