कल आज और कल -2
अब आते है मुद्दे पर,
जैसा हम अपने आसपास देख सकते हैं कि एक खास धार्मिक समुदाय अचानक से डर गया, जो गलत है, एक आम इंसान तभी डर का अनुभव करता है जब उसे किसी से किसी भी प्रकार का खतरा दिखाई दे।
पर जब वो डर जाते हैं तो आम इंसान से के जैसे घर के कोने मे दुबकते नही हैं बल्कि वो डर के कारण अपने आसपास की हर संपति को नुकसान पहुंचाते है आप खुद देखिएhttp://clkmein.com/q9jSIJ हाल ही में ये जयपुर में डर गये और क्या क्या हुआ।
डर तो ये रोज ही जाते हैं, मंदिर के घंटे की आवाज़ से डर जाते हैं ये तो कभी भजन कीर्तन से डर जाते है ।
ये म्यांमार में मुस्लिमों पर जुल्म का विरोध अपने देश की संपति को नुकसान पहुंचा कर करते है आप खुद जांच सकते है इस लिंक पर http://oke.io/OVEQ7F
ये है आज का भारत ।
अब अगर आने वाले कल की बात करें तो क्या हम ऐसा ही भारत चाहते हैं? क्या ऐसे भारत में इंसान रह पाएंगे? क्या वो खुश होंगे जो हमें आजादी दिलाने के लिए आखिरी सांस तक लडे? क्या हम फिर से दोस्त नहीं बन सकते? क्या हम ऐसा नहीं कर सकते कि तुम भी मेरी दिवाली में आओ और मैं भी तुम्हारे ईद मे ईदी दुं।
मेरे ख्याल से आप भी ऐसे डरे हुए भारत के जगह एक भयमुक्त, शांत, विकसित और अजेय भारत चाहते होंगे।
तो क्यों न हम साथ मिलकर सपनो के भारत को बुनना शुरु करें, क्यों न फिर से अपने भारत देश को महान और विश्व को मार्ग दिखाने वाला देश नहीं बना सकते हैं।
जैसा हम अपने आसपास देख सकते हैं कि एक खास धार्मिक समुदाय अचानक से डर गया, जो गलत है, एक आम इंसान तभी डर का अनुभव करता है जब उसे किसी से किसी भी प्रकार का खतरा दिखाई दे।
पर जब वो डर जाते हैं तो आम इंसान से के जैसे घर के कोने मे दुबकते नही हैं बल्कि वो डर के कारण अपने आसपास की हर संपति को नुकसान पहुंचाते है आप खुद देखिएhttp://clkmein.com/q9jSIJ हाल ही में ये जयपुर में डर गये और क्या क्या हुआ।
डर तो ये रोज ही जाते हैं, मंदिर के घंटे की आवाज़ से डर जाते हैं ये तो कभी भजन कीर्तन से डर जाते है ।
ये म्यांमार में मुस्लिमों पर जुल्म का विरोध अपने देश की संपति को नुकसान पहुंचा कर करते है आप खुद जांच सकते है इस लिंक पर http://oke.io/OVEQ7F
ये है आज का भारत ।
अब अगर आने वाले कल की बात करें तो क्या हम ऐसा ही भारत चाहते हैं? क्या ऐसे भारत में इंसान रह पाएंगे? क्या वो खुश होंगे जो हमें आजादी दिलाने के लिए आखिरी सांस तक लडे? क्या हम फिर से दोस्त नहीं बन सकते? क्या हम ऐसा नहीं कर सकते कि तुम भी मेरी दिवाली में आओ और मैं भी तुम्हारे ईद मे ईदी दुं।
मेरे ख्याल से आप भी ऐसे डरे हुए भारत के जगह एक भयमुक्त, शांत, विकसित और अजेय भारत चाहते होंगे।
तो क्यों न हम साथ मिलकर सपनो के भारत को बुनना शुरु करें, क्यों न फिर से अपने भारत देश को महान और विश्व को मार्ग दिखाने वाला देश नहीं बना सकते हैं।
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